ये एक जीवन बड़ी, कहीं छोटी न पड़
जाए ,अगर इस जीवन के फ़लसफ़े को समझने के लिए,क्या बेहतर होता ,गर माँग लेती
उधार में एक और जीवन,एक तो यह घड़ी है ,जो हर वक्त हर क्षण को बीतने का
एहसास कराती रहती है,जबकि मैंने तो अब कमरों से घड़ी को निकाल भी दिया
है,फ़िर भी ये वक्त है कि थमता ही नहीं।क्या करूँ क्या इस जहाँ में ऐसी कोई
जगह नहीं ,जहाँ वक्त का पहिया भी थमता होगा।
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