सोमवार, 22 सितंबर 2014

मील का पत्थर

ऊठो!और अपने लिए एक रास्ता चुनो!
रास्ता ऐसा हो,जो पथरीला हो,
उबड़-खाबड़ हो,जो कँटीला हो।
इस रास्ते पर चलते हुए शायद तुम सुनो,
इस बदलते समय की आवाज़ को,
पथरीले और कँटीले रास्ते पर चलकर ही,
तुम स्वयं अपना एक रास्ता तैयार करोगे,
और बनोगे तुम लीक से हटकर एक,
नई लीक के निर्माता।
इस नई लीक पर चलकर ही,
तुम अपने लहुलुहान कदमों से बढोगे,
उस पथ पर  जहाँ पहुँचने वाले तुम्हीं पहले रहोगे,
और स्थापित कर दोगे एक पत्थर,
जिसे लोग मील का पत्थर कहेंगे।

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