मुझे भी कु्छ कहना है
गुरुवार, 25 सितंबर 2014
अपनी शर्तों पर ज़िन्दगी जीने का सुकून ,
अपनी बातों पर माकूल रहने का सुकून ,
वो भला क्या जानेगा,जिसके पास न तो
लगाने को कोई शर्त है,और न ही है माकूल
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