मुमकिन होता कि,ज़िंदगी कुछ और भी आसान होती,
गर कुछ समझौते,हमने भी करना सीखा होता ।
पर समझौते करना हमने अबतक तो सीखा नहीं,
कभी समझ में ही नहीं आया कि आखिर ये,
समझौते किनसे और क्योंकर करने हैं?
आसान-सी ज़िंदगी मुमकिन करने केलिए,
समझौते मेरी समझ से इतनी भी ज़रूरी नहीं होती।
गर कुछ समझौते,हमने भी करना सीखा होता ।
पर समझौते करना हमने अबतक तो सीखा नहीं,
कभी समझ में ही नहीं आया कि आखिर ये,
समझौते किनसे और क्योंकर करने हैं?
आसान-सी ज़िंदगी मुमकिन करने केलिए,
समझौते मेरी समझ से इतनी भी ज़रूरी नहीं होती।
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