गुरुवार, 25 सितंबर 2014

आगाज़

ये रात थोड़ी लंबी ज़रूर है,पर ऐसा भी नहीं कि सवेरा नहीं होगा,
मुझे इंतज़ार है,उस सवेरे का,जहाँ सूरज अपने सुनहले रथ पर सवार होकर,
कुछ नई किरणों के साथ-साथ,लाएगा नए संदेशे,और एक नया दिन,
क्योंकि सुना है कि रविवार का दिन कुछ खास होता है ।
खास होता है इस माने भी कि इसी दिन से एक नए सप्ताह का आगाज़ होता है।

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