बाहर के खूबसुरत से मौसम को देखकर ,
मेरे घर के गमले में लगे मनी-प्लांट की बेल,
दरीचे को खोलकर ,अपनी लचीली गर्दन को थोड़ा उचकाकर,
जबरन परदे को भी थोड़ा-सा खिसकाते हुए,
बस मेरी तरह ये भी शायद मचल रही है,,
इस मौसम की नन्ही-नन्ही बूँदों से नहाने को।
आतुर है ये भी बस चले तो मेरे घर के,
बंधन से ,मुक्त होकर भागने को,
किसी अल्हड़,किशोरवय की लड़की की भाँति,
ये भी इस बात-से शा्यद अंजान है,
कि ये मौसम इतना-भी शरीफ़ नहीं
इसी दुनिया के लोगों की तरह यह मौसम,
भी अपने मिज़ाज़ को बस पल में बदल लेगा ।
मेरे घर के गमले में लगे मनी-प्लांट की बेल,
दरीचे को खोलकर ,अपनी लचीली गर्दन को थोड़ा उचकाकर,
जबरन परदे को भी थोड़ा-सा खिसकाते हुए,
बस मेरी तरह ये भी शायद मचल रही है,,
इस मौसम की नन्ही-नन्ही बूँदों से नहाने को।
आतुर है ये भी बस चले तो मेरे घर के,
बंधन से ,मुक्त होकर भागने को,
किसी अल्हड़,किशोरवय की लड़की की भाँति,
ये भी इस बात-से शा्यद अंजान है,
कि ये मौसम इतना-भी शरीफ़ नहीं
इसी दुनिया के लोगों की तरह यह मौसम,
भी अपने मिज़ाज़ को बस पल में बदल लेगा ।
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