ले चल ! ऐ मेरे हमसफ़र।
क्षितिज़ के उस पार।
हाथों में वैसे ही हाथ थाम,
जैसे धरती का हाथ आसमान थामे चलता है।
देखना है मुझे कि क्षितिज़ के उस पार ,
धरती और आकाश की एक और क्षितिज़ ।
इस क्षितिज़ में भी क्या मेल होता है?
धरती और आकाश के बीच,
और क्या यूं धरती का हाथ आसमान थामे चलता है?
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