माँ!मुझे बना दो एक नन्ही-सी चिड़िया,
कहा- माँ से एक नन्ही-सी बिटिया।
बिटिया करेगी क्या तु चिड़िया बनकर?
माँ!दूर गगन में मुझे चिड़िया बनकर,
फ़ुर्र-से उड़ते हुए दूर गगन की सैर करने जाना है।
नन्ही-सी चिड़िया बन उड़ूँ मै,माँ बना दो ना मुझे नन्ही-सी चिड़िया।
वहाँ तो मुझे कहाँ किसी से खतरा भी होगा,
ना कोई दानव और न कोई दरिंदा ही होगा।
माँ थोड़ी-सी रूँआसी होती हुई बोली-
सुन मेरी बिटिया और सुन मेरी गुड़िया।
कहाँ है?तु इस भुलावे में मेरी नन्ही-सी बिटिया,
तेरी नाजुक से पर को कतरने को मेरी चिड़िया,
वहाँ भी ताक में कुछ शिकारी बैठे होंगे,
कि कब तु अपने घोंसले से बाहर निकले,
और जाल में पकड़कर कतरे हुए परों के साथ,
भी तुझे डाल देंगे अपने पिंजरे में।
तो सुन मेरी बिटिया और सुन मेरी गुड़िया।
तु सुरक्षित है मेरी ही इस आँचल में,
मैं जीते-जी अपने इस आँचल में,
समेटे रखूँगी,तुझे अपनी नन्ही-सी चिड़िया।
कहा- माँ से एक नन्ही-सी बिटिया।
बिटिया करेगी क्या तु चिड़िया बनकर?
माँ!दूर गगन में मुझे चिड़िया बनकर,
फ़ुर्र-से उड़ते हुए दूर गगन की सैर करने जाना है।
नन्ही-सी चिड़िया बन उड़ूँ मै,माँ बना दो ना मुझे नन्ही-सी चिड़िया।
वहाँ तो मुझे कहाँ किसी से खतरा भी होगा,
ना कोई दानव और न कोई दरिंदा ही होगा।
माँ थोड़ी-सी रूँआसी होती हुई बोली-
सुन मेरी बिटिया और सुन मेरी गुड़िया।
कहाँ है?तु इस भुलावे में मेरी नन्ही-सी बिटिया,
तेरी नाजुक से पर को कतरने को मेरी चिड़िया,
वहाँ भी ताक में कुछ शिकारी बैठे होंगे,
कि कब तु अपने घोंसले से बाहर निकले,
और जाल में पकड़कर कतरे हुए परों के साथ,
भी तुझे डाल देंगे अपने पिंजरे में।
तो सुन मेरी बिटिया और सुन मेरी गुड़िया।
तु सुरक्षित है मेरी ही इस आँचल में,
मैं जीते-जी अपने इस आँचल में,
समेटे रखूँगी,तुझे अपनी नन्ही-सी चिड़िया।
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