बुधवार, 12 नवंबर 2014

नए समय का निर्माण

वक्त नया है,युग नया है,तकनीक नया,सबकुछ नया है,
तो तुम भी एक नए समय का अपने आस-पास  निर्माण करो।
तुम भी बदलो,कुछ शब्दों की धुंधली पड़ी हुई परिभाषा को,
परिभाषाओं को बदल अब इनका भी उत्थान करो।
नई सदी के शंखनाद का बिगुल आज हर ओर बज़ा  है,
सोंचो तुम मत इतना,बस सत्य के पथ का ध्यान करो।
आज के भले ही तुम बच्चे हो,आनेवाले कल के तुम्हीं भविष्य हो,
आने वाले इस नए स्वर्णिम भविष्य का तुम अब आह्वान करो।
सूरज तो अपने सातों घोड़े वाले रथ पर आज फ़िर से सवार  है,
प्रज्ज्वल और  तेजोमय मस्तक  से इस सूरज को भी अंतर्ध्यान करो।
तुम्हीं आज हो ,रहोगे कल भी ,देशों में और विदेशों में,
परचम हरदम देश के लहरा पाओ,बस इतना ही अरमान करो।
मात भले ही तुम एक दिन बच्चों,हिमालय की भी उँचाई को दे देना,
गाँठ बाँध लो,स्थिति चाहे जैसी आए,नैतिकता का सदैव मान करो।



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