असली फ़ूल आज बाज़ारों में भी कहाँ मिल रहे हैं,
बस दुकानों पर खोजने में लगे हैं ऐसे फ़ूल जो,
न कभी मुरझाते हों न ही कभी सूखते हों।
गुलाब की कलियों का एक भरा-पुरा गुलदस्ता,
आज ही बाज़ार से लेकर हम आये हैं,
जिनमें लाल सुर्ख रंग है,और परफ़्युम की बोतल से,
छिड़की हुई मेरी खुश्बू से तर गुलाब में खुश्बू भी।
साथ ही साथ इन गुलाबों में चुभने वाले काँटे नहीं।
फ़ूल तो फ़ूल हैं चाहे असली हों या नकली,
बस सजने और सजाने के लिए होते हैं,
कभी बालों को तो ,कभी घर की सुंदरता ,
देख रही हूँ गुलाब को ,कभी गुलाबों से सजे अपने घर को।
बस दुकानों पर खोजने में लगे हैं ऐसे फ़ूल जो,
न कभी मुरझाते हों न ही कभी सूखते हों।
गुलाब की कलियों का एक भरा-पुरा गुलदस्ता,
आज ही बाज़ार से लेकर हम आये हैं,
जिनमें लाल सुर्ख रंग है,और परफ़्युम की बोतल से,
छिड़की हुई मेरी खुश्बू से तर गुलाब में खुश्बू भी।
साथ ही साथ इन गुलाबों में चुभने वाले काँटे नहीं।
फ़ूल तो फ़ूल हैं चाहे असली हों या नकली,
बस सजने और सजाने के लिए होते हैं,
कभी बालों को तो ,कभी घर की सुंदरता ,
देख रही हूँ गुलाब को ,कभी गुलाबों से सजे अपने घर को।
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