गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

आँखों में फ़्लु ,इस मर्ज़ को तो पति की आँखों में होनी ही नही चाहिए थी,
खासकर उस पत्नी से पूछिए कि उन्हीं आँखों को देखने तक की मनाही है।
जिन आँखों को देखकर मेरी सुबह और शाम होती थी,
आज उन्हीं आँखों से साहब खुद से मुझे दूर किए बैठे हैं।
हर बार बस यही जुमला सुनने को मिल रहा है,
कि तुम्हे यह फ़्लु नहीं होना चाहिए,मैं परेशान हो जाउँगा।
गर मेरी आँखों मे फ़्लु होती भी तो वो कैसे परेशान होते हैं?
शायद,यह भी जनाब का प्यार जताने का ही एक तरीका है,
तकलीफ़ मेरी शायद उन्हें देखने की आदत जो नही है,
सो अपनी आँखों मे ज़लन को मुझमें महसूस कर वे परेशान होते हैं।

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