सोमवार, 13 जुलाई 2015
वैवाहिक-बलात्कार
उठो और जागो! मेरी सारी सहेलियाँ,बेटियाँ और बहना,
तुम सोती रहोगी,आखिर कबतक सोती रहोगी?
पता है,कुछ तुम्हें कि कानून की किताब में,
आखिर! बलात्कार की परिभाषा क्या होती होगी?
अबतक यही जाना था,कि जबरन बनाए गए वे संबंध,
जिसमें तुम्हारी शायद मर्ज़ी शामिल नहीं होती होगी।
पर सुना है,कि कानूनगो ने एक नया संशोधन पारित किया है,
जिसमें कुछ बलात्कार को तुम अब बलात्कार नहीं कहोगी।
तुम तो किसी की पत्नी हो,कन्यादान कर दिया गया है तुम्हारा,
और तुम अपने पति-से संबंध बनाने-से इंकार करोगी?
इतनी हैसियत तुम्हें अभी नहीं देना चाहता है,यह कानून,
क्योंकि वस्तु की तरह तुम भी इस्तेमाल की जाओगी।
वैवाहिक-बलात्कार को कभी भी तुम वैवाहिक-बलात्कार न कहना,मेरी बहना!
क्योंकि अब-से पति द्वारा जबरन बनाए संबंध की परिभाषा कुछ बदल गयी है।
दु:खी हो! जानकर कि क्लांत शरीर,और तिक्त मन से भी,तुम अनमनी हो,
पर फिर भी पति को मिले कानूनी उपहार से तुम्हारा वैवाहिक बलात्कार होगा।
शायद उन दिनों भी जब शरीर थका होगा,मन बुझा होगा,
और तुम्हारी पेड़ुओं में और पोर-पोर में एक असहनीय पीड़ा होगी,तुम बेजान सोई होगी।
फ़िर भी ,अंधेरे में! तुम अब न चीखना और न चिल्लाने की गुस्ताखी ही करना,मेरी बहना!
क्योंकि,यह वैवाहिक बलात्कार अब किसी किताब में बलात्कार नहीं होगी।
रोना मत मेरी बहना!और भी नई मान्यताएँ हैं,जो बन चुकी है,अब कानूनी वैधताएँ।
कुछ बाकी है,जो तुम्हें जानना होगा,कि तुम कैसे वैधता के नाम पर,इस बेड़ी में कसमसाओगी?
विवाह की तय उम्र तुम्हारी परिपक्वता निर्धारित करती थी,अबतक यही जाना था,
हँसना मत बहना!18वें साल में तुम्हारी परिपक्वता तो बीते ज़माने की पुरानी एक बात हुई,
और अब भी तुम ब्याही जाती हो,उम्र के 15वें वय में भी,तो क्या होगा?
कुछ सवाल उठते होंगे तुम्हारे अल्हड़ मन में,ब्याह होगा,तो क्या होगा?
भोली बहना!तुम तब भी किसी की पत्नी के हक से रौंदी जाओगी,
पर हलक-में सिसकना,और इसे किसी-से वैवाहिक-बलात्कार न कहना।
क्योंकि किसी की ब्याहता होने के नाते,उचित-अनुचित कुछ भी नहीं।
चाहे तुम्हारी कोमल काया अभी,अपरिपक्व हैं उस वैवाहिक-बलात्कार के लिए,
फिर भी!सब उचित ही उचित है,वैधता का प्रमाणपत्र निर्गत हुआ है,इसके लिए,
तुम तो बस एक उपभोग की वस्तु हो,किससे तुम वैवाहिक-बलात्कार की बात कहोगी?
वैवाहिक-बलात्कार तुम्हारे कन्यादान के दिन, उन मंत्रों में शामिल था,
जिस दिन तुमने सात फेरे लिए थे,और ब्याही गयी थी,वहाँ समाज और,सभी देव की गवाही थी।
फिर बहना!तुम किससे कहोगी,कि तुम्हारा हर दिन ही होता है,वैवाहिक-बलात्कार?
कानून का ज़ामा पहनकर यह रौंदेगा,हरदिन,और करेगा,तुम्हारा पति ही यह वैवाहिक बलात्कार।
हर दिन होगा बहना! तुम्हारा वैवाहिक-बलात्कार,वैवाहिक बलात्कार।………मंजू शर्मा
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