बुधवार, 18 फ़रवरी 2015

एक तो इस दूरंतो रानी से दूर के सफ़र पे निकलना है, फ़िर काहे को देर-पे-देर किए जा रही है? , ऐसे ही कुछ दिल के अपनों से दूर भी तो होना है, ऐसे में ये देर और दूरी दोनों ही परेशां किए जा रही है। सबकुछ साफ़ है,दिल्ली का कोहरा दूर जा चुका है, तमाम नेता भी दिल थाम के अब बैठे हैं,दो दिनों के बाद, देखें इस दिल्ली की नए युग की आगाज़, दिल्लीवालों के दिल में कौन-सी पार्टी सही छवि अपनी बना रही है? कहीं दूर जाकर भी नज़र तो यहीं थम-सी रही है, आज इस दिल्ली में,कल दिल में दिल्ली को होना है। अंत हो इस मीलो-मील दूरी का,जो अपनों से दूरी कु्छ बढाए जा रही है, उस राह पहुँच जाएँ,हर राह जहाँ पर बसता मेरा एक अपना है।

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